पौड़ी : पिछले दिनों पौड़ी बस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों के साथ हरिद्वार जिला प्रशासन ने बड़ा भद्दा मजाक किया है. हरिद्वार जिला प्रशासन की इस हरकत से एक बार फिर अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही इस मामले में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने नाराजगी जताई है.

दरअसल, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने पौड़ी बस हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों को आर्थिक मदद देने का ऐलान किया था. सीएम धामी के ऐलान पर परिजनों को आर्थिक मदद के चेक भी दिए गए. लेकिन अधिकारियों की लापरवाही की हद तब हो गई जब चेक पर आश्रितों के बचाए गए मृतकों के नाम लिखे गए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर अधिकारी कितनी गंभीरता से काम करते हैं.

बता दें कि चार अक्टूबर को बारात से भरी एक बस हरिद्वार के लालढांग से पौड़ी जिले के बीरोंखाल के लिए रवाना हुई थी. लेकिन अपने गंतव्य पर पहुंचने से पहले ही बस हादसे का शिकार हो गई और सीधे खाई में जा गिरी। इस हादसे में 32 लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.

इस हादसे पर पीएम मोदी, राष्ट्रपति और केंद्रीय गृह मंत्री ने दुख जताया है. वहीं, राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रत्येक मृतक के परिजन को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि देने का आदेश जारी किया था. आदेश के 2 हफ्ते बाद भी मृतक के परिजनों को राहत राशि नहीं मिली और जो मिले उनका मजाक भी उड़ाया गया. राहत राशि के चेक पर परिवार की जगह मृतक का नाम था।

परिजनों ने चेक बैंक में डाला तो पता चला कि यह चेक कैश नहीं होगा। क्योंकि जिनके नाम से चेक काटे गए हैं, वे इस दुनिया में नहीं हैं। हालांकि जैसे ही ये यह मामला तूल पकड़ा वैसे ही अधिकारियों ने कर्मचारियों को पीड़ितों के घर भेज कर सारे चेक वापस मंगवाए.

यह खबर जैसे ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दरबार में पहुंची तो उन्होंने इस पर नाराजगी भी जाहिर की. साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिला प्रशासन को तलब करते हुए कहा कि हादसे के 25 दिन बाद भी मृतक के आश्रितों को राशि नहीं मिली और चेक देने वालों के नाम पर लापरवाही क्यों की गयी. बता दें कि मृतक के आश्रितों को चेक देने की जिम्मेदारी क्षेत्र के एसडीएम पूर्ण सिंह राणा के पास थी.