मोदी सरनेम मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत के तीन दिन बाद राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता बहाल हो गई है. अब कांग्रेस नेता संसद की कार्यवाही में हिस्सा ले सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट द्वारा सजा पर रोक लगाने के बाद लोकसभा सचिवालय ने इस संबंध में फैसला लिया है. कांग्रेस राहुल गांधी की सदस्यता बहाल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही थी.

समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अगर सोमवार (7 अगस्त) शाम तक राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता बहाल नहीं की गई तो कांग्रेस मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती है। हालांकि उससे पहले ही राहुल गांधी की सदस्यता बहाल हो गई है. अब वह दोबारा सांसद बन गये हैं.

अधिसूचना लोकसभा सचिवालय ने जारी कर दी है

लोकसभा सचिवालय से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि 24 मार्च, 2023 को जारी अधिसूचना के क्रम में, सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त, 2023 को एक विशेष अपील पर, केरल के वायनाड संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले लोकसभा सदस्य राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगा दी, जिसके बारे में सूरत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने 23 मार्च, 2023 को आदेश दिया था.

इसमें आगे कहा गया है कि, सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त, 2023 के आदेश के मद्देनजर, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 102 (1)(ई) के सेक्शन 8 में वर्णित जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत 24 मार्च, 2023 को जारी श्री राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द करने संबंधी अधिसूचना अगले न्यायिक आदेश तक खत्म की जाती है.

मार्च में सज़ा सुनाई गई

मार्च 2023 में, गुजरात की एक अदालत ने राहुल गांधी को 2019 में एक चुनावी रैली में उपनाम मोदी के बारे में दिए गए एक बयान के लिए दो साल जेल की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के अगले दिन लोकसभा सचिवालय ने संसद की सदस्यता रद्द करने का नोटिस जारी किया. राहुल गांधी ने 2019 का चुनाव केरल के वायनाड संसदीय क्षेत्र से जीता।

सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी

राहुल गांधी की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (4 अगस्त) को निचली अदालत के सजा आदेश पर रोक लगा दी। जबकि राहुल गांधी ने सजा के खिलाफ अपील दायर की है, सूरत सत्र न्यायालय से सजा पर फैसला आने तक रोक जारी रहेगी।

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