जौनपुर , पहाड़ न्यूज टीम

दोस्तों मेरे साथ एक ऐसी शख्सियत है जिन्होंने लोगों को सोते हो ,जागते हो या गाड़ी में हो बिल्कुल नचा दिया है और सुरेतु मामा गीत की गायिका मंजू नौटियाल जी है आज उनसे थोडी सी बातचीत करेंगे कि उन्होंने कैसे इस गाने को लिखा , कैसे गया ,क्या इनके दिमाग में था

जौनपुर की रहने वाली मंजू नौटियाल ने अपनी लोक संस्कृति पर आधारित कई गीत गाए, जिन्हें दर्शकों ने खूब पसंद किया है , लेकिन मंजू के संगीत करियर को सुरेतु मामा गाने ने एक नया मोड़ दिया और आज जौनपुर, जौनसार से लेकर गढ़वाल कुमाऊं तक सभी मंजू नौटियाल को हर कोई पहचानने लगा है। यह गीत जौनपुर जौनसार के हारुल की धुन पर बना है।

सुरेतु मामा गाने को मंजू नौटियाल ने कंपोज किया है और संगीत हरिओम शरण ने दिया है। रीति-रिवाजों और संस्कृति पर आधारित इस गीत को श्रोताओं ने खूब सराहा हैं। you tube पर एक मिलियन से ज्यादा व्यूज बटोर चुके हैं। शादी के फंक्शन में इस गाने की काफी डिमांड रहती है और सुनने वाले नाचने लगते हैं.

तो मंजू नौटियाल जी आप बताइये ये सुरेतु मामा गीत का विचार आपके दिमाग में कैसे आया

ये हमारा पारम्परिक गीत है ये गीत मैंने अपने कल्चर के आधार पर लिखा है हमारे कल्चर में क्या-क्या होता है उसी को लेकर मैंने गीत बनाया है जो लोगो को बहुत पसंद आ रहा है गाने तो मैंने काफी लिखे है सुरेतु मामा गीत मैंने ऐसे ही बना लिया था इस गाने को लोग काफी पसंद कर रहे है। ,गत वर्ष अक्टूबर में रिलीज़ हुए गीत सुरेतु मामा ने अब तक यूट्यूब पर 8 मिलियन से अधिक व्यूज बटोर लिए हैं।

शादी हो या पार्टी सबसे पहले सुरेतु मामा गीत ही बज रहा है शादी समारोहों में इस गीत की बहुत डिमांड होती है और श्रोता जमकर थिरकते हैं।आप भी जरूर इस गीत पर थिरके होंगे या आपने सुना भी जरूर होगा। इस गाने से पहले मेरे लगभग 15 – 16 गाने और भी है अच्छा तो उनमें से एक गाना है बिंदिया गीत और बाबा की प्यारी एल्बम भी बहुत बढ़िया थी। लोगो को बहुत पसंद आयी है।

बचपन से ही मुझे गाने का शौक था लेकिन कभी परिवार वालो ने मेरा साथ नहीं दिया था बीच में तो काफी टाइम ऐसा हो गया था कि काम नहीं नाम मिल रहा था पर अभी एक गाने से मेरे को अपना नाम मिल गया है 2018 से गायन क्षेत्र से जुडी मंजू नौटियाल को सुरेतु मामा गीत ने एक नई पहचान दी अब आलम ये है कि मंजू के पास कई गीतों के ऑफर आने लगे हैं।

आप बचपन में किसके गीत सुनती थी

रेशमा शाह जौनपुर की पहली महिला गायक है इनके में गीत सुनती थी। घर से कभी मुझे सपोर्ट नहीं मिला है ये मैने अपनी लगन से सीखा है.

कहते हैं मेहनत और लगन से किसी काम को किया जाए तो जरूर एक ना एक दिन सफलता जरूर मिलती है,ऐसा ही कुछ हुआ मंजू नौटियाल के साथ हुआ है.

आज कल के युवाओ को क्या करना चाहिए

आजकल युवाओ की भी इच्छा है वह अपनी इच्छा को कभी खत्म ना करें अच्छी बात है कि अगर किसी का कोई फैशन है तो उसे उसी फैशन में कुछ ना कुछ करते रहना चाहिए। कल आपको टाइम देना पड़ेगा और जो कि मंजू नौटियाल जी ने दिया है और उसमे वे कामयाब हुई है।

लास्ट में आप लोगो से क्या बोलना चाहती है

आपकी बेटी हो बहू हो सबसे पहले तो वह घर की औरत है जो होती है उनको इतना सपोर्ट दो कि मतलब वह भी अपनी अपनी इच्छाओं को पूरी कर सके और बच्चे जितने छोटे बच्चे हैं। उनके अंदर जो टैलेंट है उसे देखो उसे समझो और उन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश करो .