नैनबाग , PAHAAD NEWS TEAM

जहां क्षेत्र के सभी ग्रामीणों व भक्त जनों ने भद्राज देवता की डोली के दर्शन कर यमुना नदी में डोली के साथ स्नान किया।सोमवार को जौनपुर के ईष्ट भद्राज देवता की डोली अपने देवस्थल निवास स्थान जय द्वार गांव से ढोल नगाड़ों के साथ यमुना नदी में स्नान करने पहुंची। इसके बाद भद्राज देवता की डोली रात्रि को अपने देवस्थल जयद्वार गांव पहुंची जहां ग्रामीणों वह भक्तजनों द्वारा रात्रि जागरण व भंडारा किया गया।तथा मंगलवार 19 अप्रैल 6 गते बैसाख को प्रातः 9:00 बजे देव पालकी की डोली श्री भद्राज मंदिर त्याड़ा के लिए प्रस्थान करेगी । जहां हर वर्ष मेले का आयोजन किया जाता है।

जहां जौनपुर के ग्रामीणों के साथ- साथ क्षेत्र के भक्तजनों का भारी संख्या में मेले में पहुंचकर भद्राज देवता के दर्शन कर अपने तथा अपने परिवार की खुशहाली सुख शांति हेतु मन्नत मांगी जाती है।त्याड़ा भद्राज देवता मंदिर नैनबाग से जयद्वार करीब लगभग 15 किमी सड़क के बाद जयद्वार गांव से करीब 10 किमी पैदल मार्ग है। हिमालय की गोद देवदार की शुद्ध हवा व बांस बुरांश वृक्षों के बीच सुंदर भव्य ईष्ट देवता भद्राज का मंदिर विराजमान है। जहां समस्त जौनपुर के ग्रामीणों और भक्त जनों द्वारा अपने ईष्ट देवता के दर्शन कर अपने तथा अपने परिवार वह क्षेत्र की खुशहाली हेतु पूजा अर्चना व दूध से बने पकवान वह दूध देवता को चढ़ाए जाते हैं।

उत्‍तराखंड न्यूज़ : भद्राज देवता की डोली जयद्वार गांव से ढोल नगाड़ों के साथ नैनबाग के समीप यमुना नदी में पहुंची।

भद्राज मेला संस्कृतिक एवं पर्यटन विकास समिति के अध्यक्ष जोत सिंह रावत व पूर्व अध्यक्ष शरण सिंह पंवार का कहना है कि हमारे द्वारा सरकार को बार-बार आग्रह किया गया है कि भद्राज मेला सांस्कृतिक एवं पर्यटन विकास समिति त्याड़ा जयद्वार को सरकारी मेला घोषित करने के साथ-साथ इसे पर्यटन के साथ जोड़ा जाए । तथा जयद्वार से त्याड़ा मंदिर तक इसे रोड से भी जोड़ा जाए जिससे मेले की शोभा को और बढ़ाया जाए।