जौनपुर (टिहरी गढ़वाल)। जौनपुर क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और करीब दो शताब्दियों से चली आ रही ऐतिहासिक परंपरा राज मौण मेला इस वर्ष 27 जून 2026 को अगलाड़ नदी में हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया जाएगा। अगलाड़ नदी मौण मेला विकास समिति ने इस संबंध में क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में मेले में शामिल होने की अपील की है।
समिति द्वारा जारी सूचना के अनुसार, इस वर्ष के मौण मेले की पांत (आयोजन की जिम्मेदारी) अठजुला क्षेत्र को सौंपी गई है। स्थानीय ग्रामीणों और मेला समिति के सहयोग से मेले की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। आयोजकों का कहना है कि यह केवल एक मेला नहीं, बल्कि जौनपुर की लोक संस्कृति, सामाजिक एकता और पारंपरिक विरासत का जीवंत प्रतीक है।
मौण मेला उत्तराखंड के सबसे अनोखे पारंपरिक मेलों में गिना जाता है। इस अवसर पर हजारों ग्रामीण अगलाड़ नदी में उतरकर पारंपरिक तरीके से मछली पकड़ने की प्राचीन परंपरा निभाते हैं। इसके लिए टिमरू (Timru) वृक्ष की छाल से तैयार किए गए “मौण” का उपयोग किया जाता है, जिससे मछलियां कुछ समय के लिए अचेत हो जाती हैं और बाद में पुनः सामान्य अवस्था में लौट आती हैं। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और स्थानीय लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है।
इतिहासकारों और स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, मौण मेला राजशाही काल से जुड़ा हुआ है और टिहरी रियासत के समय से इसका आयोजन होता आ रहा है। कई स्रोत इसे लगभग 200 वर्ष पुरानी परंपरा बताते हैं, जिसमें टिहरी नरेश भी भाग लेते थे। समय के साथ यह आयोजन जौनपुर, जौनसार और रवाईं क्षेत्र के लोगों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक मेल-मिलाप का प्रमुख अवसर बन गया।
मेला समिति ने क्षेत्र के सभी लोगों से इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेकर इसे सफल बनाने की अपील की है। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों लोगों के अगलाड़ नदी तट पर जुटने की संभावना है, जहां लोक संस्कृति, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और सामुदायिक सहभागिता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
रिपोर्ट: उपेंद्र सिंह रावत
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