प्रदेश में नदियों एवं खनन पट्टों से उपखनिज शुल्क की दरों में कमी की गई है। जिससे खनन सामग्री बालू, बजरी और पत्थर के दामों में कमी आएगी। जिससे लोगों का घर बनाना सस्ता पड़ेगा। शासन की ओर से निगमों एवं निजी व्यक्तियों के स्वामित्व वाली भूमि से उपखनिज शुल्क के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
विभिन्न दरों में एकरूपता के लिए भी सरकार द्वारा प्रयास किए गए हैं। इससे सरकारी निगमों के पट्टों से सामग्री उठाने से होने वाले राजस्व में भी वृद्धि होगी। गढ़वाल मंडल विकास निगम और कुमाऊं मंडल विकास निगम राज्य के वन क्षेत्रों की नदियों से गौण खनिजों के निष्कर्षण के लिए जिम्मेदार हैं।
इसके अलावा निजी भूमि से बालू, बिजली, पत्थर आदि उपखनिजों का उत्खनन किया जा रहा है, लेकिन जो शुल्क स्टैंप ड्यूटी, जिला खनिज फाउंडेशन को अंशदान और मुआवजा के नाम पर वसूला जा रहा था। इससे निजी मापी भूमि के पट्टे की तुलना में निगम क्षेत्र से बालू, बजरी व पत्थर की कीमत अधिक मिल रही थी।

मुआवजा शुल्क 15 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया गया
यही कारण रहा कि वन विकास निगम की गौला, कोसी, दाबका, नंधौरा सहित अन्य नदियों से उपखनिजों का उठाव बहुत कम हुआ। जिससे लोगों को निर्माण सामग्री महंगी दरों पर मिल रही थी। वहीं इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा था। इसे देखते हुए शासन द्वारा जिला खनिज फाउंडेशन के अंशदान को 25 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। जबकि क्षतिपूर्ति शुल्क को 15 प्रतिशत से कम कर 10 प्रतिशत किया गया है। इसके अलावा कुछ अन्य शुल्क भी कम किए गए हैं।
मुआवजा शुल्क 15 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा कुछ और चार्जेज भी कम किए गए हैं।
पहले वन निगम के गौण खनिजों के दाम अधिक थे, जबकि निजी के कम। सरकार ने हर जगह दरें एक समान करने की कोशिश की है। इससे राजस्व में वृद्धि होगी और लोग सस्ती दरों पर खनिज प्राप्त कर सकेंगे। प्रति क्विंटल के भाव छह से सात रुपये कम होंगे। -राहुल, वन विकास निगम के महाप्रबंधक

