मसूरी , PAHAAD NEWS TEAM

शहर में प्रतिदिन 2.50 एमएलडी पानी की आपूर्ति करने वाले जिंसी पेयजल स्रोत को निर्माणाधीन कैम्पटी-थत्यूड़ सड़क मार्ग के निर्माण से संकट खड़ा हो गया है. आपको बता दें कि जिंसी पेयजल स्रोत मसूरी के करीब 25 प्रतिशत पेयजन आपूर्ति को पूरा करता है । जिंसी पेयजल स्रोत होने वाले नुकसान को लेकर मसूरी-गढ़वाल जल संस्थान के अधिकारी भी चिंतित दिखाई दे रहे हैं. इसके लिए उन्होंने सड़क निर्माण एजेंसी लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) थत्यूड़ डिविजन को पत्र भेजकर चिंता जाहिर की है.

मसूरी का उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र टिहरी जिले के जौनपुर ब्लॉक से सटा हुआ है। क्षेत्र के लोगों की मांग पर पर कैम्पटी से जिंसी होते हुए नए मोटर मार्ग का निर्माण करवाया लोक निर्माण विभाग द्वारा करवाया जा रहा है . जिसके लिए पहाड़ काटने का काम किया जा रहा है. पहाड़ की कटाई से मलबा, पत्थर आदि सड़क किनारे जंगल और खाइयों में फेंका जा रहा हैं जिससे जिंसी सड़क के नीचे जल स्रोत से खतरा पैदा हो गया है ।

गढ़वाल जल संस्थान मसूरी के अधिशासी अभियंता केसी पैन्यूली का कहना है कि अगर जलस्रोत के पास खाई में मलबा डाला जा रहा है, जिससे जिंसी जलस्रोत के सूखने का खतरा है. उन्होंने कहा कि जल स्रोत को नुकसान से बचाने के लिए लोक निर्माण विभाग थत्यूड़ के अधिशासी अभियंता को पत्र भेजकर जलसंस्थान व लोनिवि थत्यूड़ द्वारा जल स्रोत का संयुक्त निरीक्षण करने और अगर संभव हो तो सड़क अलाइनमेंट बदलने का आग्रह किया है. जिससे जल स्रोत को बचाया जा सके ।

ग्रामीण मोहन रमोला और भगवती प्रसाद ने कहा कि सड़क के निर्माण से ग्रामीणों को कोई फायदा नहीं हो रहा है, क्योंकि गांव को सड़कों से नहीं जोड़ा जा रहा है जिस तरह से सड़क निर्माण के लिए पहाड़ों को काटा जा रहा है और उसका मलबा जंगलों और नालों में डाला जा रहा है. उन्होंने कहा कि पहाड़ों के लगातार कटने से जिंसी जलस्रोत पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है. आने वाले समय में यह जलस्रोत पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। जिसके बाद मसूरी के साथ जिंसी और आसपास के गांवों को भी पीने के पानी की भारी समस्या से जूझना पड़ेगा.

लोक निर्माण विभाग थत्यूड़ डिविजन के कार्यपालक अभियंता रजनीश कुमार सैनी का कहना है कि जिंसी जलस्रोत के पास गदेरा है, जिस ऊपर लोनिवि द्वारा पुलिया निर्माण का आश्वासन दिया गया है . मलबा व पत्थरों को गदेरे में नहीं फेंका जाएगा और जल स्रोत को नुकसान से बचाने के हरसंभव प्रयास किये जाएंगे । उन्होंने कहा कि जल संस्थान अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण करने का आश्वासन दिया है .

उनका यह भी कहना है कि वन विभाग द्वारा सड़क निर्माण के लिए एनओसी जारी होने के बाद सड़क निर्माण के लिए सर्वे किया गया था और अब अलाइनमेंट में बदलाव संभव नहीं है.