देहरादून , PAHAAD NEWS TEAM
अनिल बलूनी के उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री के तौर पर मुहर लगने की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है. रायपुर विधानसभा सीट से बीजेपी के नवनिर्वाचित विधायक उमेश शर्मा काऊ ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर आलाकमान अनिल बलूनी को मुख्यमंत्री बना देता है तो वह 10 बार अपनी सीट छोड़ने को तैयार हैं।
बता दें कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला नहीं हुआ है. ऐसे में मुख्यमंत्री की दौड़ में पूर्व सीएम धामी, अनिल बलूनी, अजय भट्ट, सतपाल महाराज और धन सिंह रावत का नाम चर्चा में है.
वहीं राजपुर विधानसभा से बीजेपी विधायक और मजबूत नेता उमेश शर्मा कौ का एक बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि अगर आलाकमान अनिल बलूनी को मुख्यमंत्री घोषित करता है तो वह उनके लिए एक नहीं बल्कि दस बार अपनी विधानसभा सीट छोड़ने को तैयार हैं.
कौन हैं अनिल बलूनी: अनिल बलूनी राज्यसभा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी है और उन्होंने उत्तराखंड की धरती से ही राजनीति सीखी है। बलूनी की गिनती शांत स्वभाव के नेताओं में होती है। वह हर शब्द को नाप-तौल कर बोलने वाले व्यक्ति है। इस वजह से सामने वाले को पता ही नहीं चलता कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है। अनिल बलूनी कभी पत्रकार थे और आज उनकी गिनती पीएम मोदी और अमित शाह के करीबी दोस्तों में होती है। पार्टी में उनकी अच्छी पकड़ है। कहा जाता है कि अनिल उत्तराखंड के लोगों की नब्ज गिनने में माहिर हैं.
कोटद्वार से लड़ा पहला उपचुनाव: अनिल बलूनी का जन्म 2 सितंबर 1972 को उत्तराखंड में हुआ था। राज्य के नकोट गांव में जन्मे बलूनी बचपन से ही राजनीति में सक्रिय हैं। वह पहले भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राज्य महासचिव, फिर निशंक सरकार में वन्यजीव बोर्ड में उपाध्यक्ष, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और फिर राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख थे।
अनिल ने 26 साल की उम्र में राजनीति में प्रवेश किया था और 2002 में राज्य के पहले विधानसभा चुनाव में कोटद्वार सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी की थी। लेकिन उनका नामांकन खारिज हो गया था। इससे नाराज होकर बलूनी कोर्ट पहुंचे और फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2004 में कोटद्वार से उपचुनाव लड़ा। हालांकि, वे हार गए। इसके बाद भी राजनीति में उनकी दिलचस्पी कभी कम नहीं हुई और हमेशा सक्रिय रहे।
बने सुंदर सिंह भंडारी के ओएसडी: पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान भी अनिल बलूनी राजनीति में सक्रिय थे और दिल्ली संघ परिवार के दफ्तरों में घूमते थे. संघ के जाने-माने नेता सुंदर सिंह भंडारी से उनकी दोस्ती हो गई। जब सुंदर सिंह भंडारी को बिहार का राज्यपाल बनाया गया, तो उन्होंने अनिल बलूनी को अपना विशेष कर्तव्य अधिकारी (ओएसडी) चुना। इसके बाद जब सुंदर जब गुजरात के राज्यपाल बने तो भी बलूनी को साथ ले गए । ये वो समय था जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे.
नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने भी माना भरोसेमंद: अनिल बलूनी ने नरेंद्र मोदी से दोस्ती की और धीरे-धीरे अपने चहेते लोगों में जगह बनाई. 2014 में अमित शाह के अध्यक्ष बनने के बाद, अनिल बलूनी को पार्टी का प्रवक्ता और मीडिया सेल का प्रमुख बनाया गया। वह अमित शाह के भरोसेमंद लोगों में भी शामिल हुए।
पार्टी की हर खबर पर रहती है नजर: फिलहाल अनिल बलूनी मीडिया से जुड़े तमाम काम देखते हैं और पार्टी से जुड़ी हर खबर पर नजर रखते हैं. जरूरत पड़ने पर अनिल भी बीच-बचाव करते हैं। इसके अलावा वह शाह और पीएम मोदी के मीडिया से जुड़े कार्यक्रमों को भी मैनेज करते हैं। जब पार्टी की छवि की बात आती है, तो स्थिति को संभालने के लिए अनिल बलूनी पार्टी प्रवक्ताओं और वरिष्ठ नेताओं को नियुक्त करते हैं।

