मसूरी , PAHAAD NEWS TEAM
केंद्र सरकार ने सभी प्रकार के राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और पुलों के निर्माण की लागत को युक्तिसंगत बनाया है। सरकार के इस फैसले से राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल टैक्स की दरें और इसकी वसूली की समयावधि कम हो जाएगी। इसका सीधा फायदा सड़क यात्रियों को होगा। साथ ही नए नियम से राजमार्ग परियोजनाओं की मनमानी लागत निर्धारण पर भी अंकुश लगेगा।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पिछले हफ्ते नए नियम जारी किए हैं। नए नियम सलाहकारों और अधिकारियों की मिलीभगत से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में सड़क परियोजनाओं की लागत को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा । इससे सरकारी खजाने की लूट और हेराफेरी में कमी आएगी। अधिकारी ने बताया कि विभाग ने टू-लेन, फोर-लेन और सिक्स-लेन नेशनल हाईवे के निर्माण के अलावा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और पुलों के निर्माण के लिए रेट भी तय किए हैं.
उन्होंने कहा कि मंत्रालय द्वारा राजमार्ग निर्माण की लागत को युक्तिसंगत बनाने के बाद अब सलाहकार डीपीआर में परियोजना की लागत नहीं बढ़ा पाएंगे. हालांकि पहाड़ी इलाकों और विशेष परिस्थितियों में इनकी कीमत बढ़ाई जा सकती है। लेकिन इसके लिए इंजीनियर प्रोजेक्ट की समीक्षा करेंगे। इसके बाद ही लागत बढ़ाने पर फैसला लिया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना की लागत के हिसाब से टोल टैक्स की दरें और वसूली की अवधि तय की जाती है.
निर्माण की निश्चित लागत
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पेवशोल्डर (पांच किलोमीटर) के साथ ग्रीनफील्ड टू-लेन नेशनल हाईवे के निर्माण की लागत 21.400 करोड़ रुपये तय की गई है. नए राजमार्ग के निर्माण की लागत में भूमि अधिग्रहण, अर्थ वर्क, तारकोल, बोल्डर, समतल जमीन से ऊंचाई आदि को शामिल किया गया है। इस प्रकार नए राष्ट्रीय राजमार्गों की प्रति किलोमीटर लागत 4.280 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसी कड़ी में ग्रीनफील्ड फोर लेन हाईवे (5 किमी) के निर्माण की लागत 40.975 करोड़ रुपये (8.195 करोड़ प्रति किमी) और सिक्स लेन हाईवे (5 किमी) के निर्माण पर 47.225 करोड़ रुपये (9.44 करोड़ प्रति किमी) खर्च होगा।
फिलहाल ये हैं निर्माण की दरें
वर्तमान में टू लेन हाईवे को चौड़ा करने की लागत 5 से 6 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर है। जबकि भूमि अधिग्रहण में कोई मुआवजा नहीं देना है। इसी तरह फोर लेन हाईवे पर 9 से 10 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर और सिक्स लेन निर्माण पर 14 से 16 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर खर्च किया जा रहा है.

