देहरादून , PAHAAD NEWS TEAM

हेमकुंड साहिब रोपवे निर्माण का ठेका लेने में चार कंपनियों द्वारा धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. पर्यटन विकास अधिकारी अतुल भंडारी की शिकायत पर कैंट थाने में चारों कंपनियों के 11 निदेशकों के खिलाफ धोखाधड़ी व जालसाजी का मामला दर्ज किया गया है. वहीं, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

ये है पूरा मामला : पर्यटन विकास अधिकारी अतुल भंडारी ने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि घांघरिया से हेमकुंड साहिब रोपवे योजना को पीपीपी मोड पर विकसित किया जाना था. इसी वजह से विभाग ने हाल ही में टेंडर जारी किए थे। इनमें से चार निजी निवेशकों के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए। इस अनुबंध के तहत इन कंपनियों को परफॉर्मर्स सिक्योरिटी के रूप में 2.5 करोड़ रुपये की गारंटी जमा करनी थी। कंपनियों ने निर्माण शुरू नहीं किया तो मामले की जांच की गई। पता चला कि इन कंपनियों ने भारतीय स्टेट बैंक की गोल मार्केट नई दिल्ली स्थित बैंक की फर्जी बैंक गारंटी विभाग में पेश की थी ।

पर्यटन विकास अधिकारी की शिकायत पर मामला दर्ज : थाना प्रभारी शंकर सिंह बिष्ट ने बताया कि पर्यटन विकास अधिकारी की शिकायत के आधार पर हेमकुंड रोपवे प्रोजेक्ट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड- 24 डी, एन 101, कनॉट सर्कस के डायरेक्टर मुकेश जोशी, अशोक सिरोही, अनिल कुमार निवासी नई दिल्ली और मैसर्स सहा बिल्डस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अशोक सिरोही, अनिल कुमार, पाइन एंड पीक डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड डायरेक्टर हितेश जोशी, पुनीत सिंघल, मुकेश जोशी, भस्करानन्द कला, सुरेश कुमार और मैसर्स आरके आनंद के डायरेक्टर आरके आनंद के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया गया है। वहीं, पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।

पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है हेमकुंड साहिब रोपवे: आपको बता दें कि हेमकुंड साहिब रोपवे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है. हेमकुंड साहिब की यात्रा फिलहाल काफी कठिन है। यात्रियों को मीलों पैदल चलकर जाना पड़ता है। पहले चरण में घांघरिया को हेमकुंड साहिब पैदल मार्ग से जोड़ने वाली सड़क पर रोपवे लगाया जाना है। रोपवे लगने के बाद यात्रियों के लिए घांघरिया से हेमकुंड पहुंचना आसान हो जाएगा। जबकि सर्वे का काम पहले ही पूरा कर लिया गया था।

ये है हेमकुंड साहिब रोपवे की पूरी योजना: हेमकुंड साहिब रोपवे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। हेमकुंड साहिब की यात्रा वर्तमान में बहुत कठिन और दर्दनाक है। गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक 19 किलोमीटर की दूरी तय कर श्रद्धालु पहुंचते हैं। तीर्थयात्रियों के लिए 2 दिन लगते हैं। केंद्र सरकार की पहल पर 764 करोड़ की लागत से बनने वाले गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे के निर्माण की कवायद शुरू हो गई है.

पहले चरण में घांघरिया को हेमकुंड साहिब पैदल मार्ग से जोड़ने वाली सड़क पर रोपवे लगाया जाएगा। घांघरिया से हेमकुंड की दूरी पैदल 6 किमी है। रोपवे लगने के बाद तीर्थयात्री कुछ ही मिनटों में घांघरिया से हेमकुंड साहिब पहुंच सकेंगे। दूसरे चरण में गोविंदघाट से घांघरिया तक रोपवे का काम शुरू होगा। इसका सर्वे भी पूरा हो चुका है। काम जल्द शुरू होना है।

हेमकुंड साहिब के बारे में जानिए हेमकुंड साहिब उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित सिखों का एक प्रसिद्ध स्थल है। यह हिमालय में एक बर्फीली झील के किनारे सात पहाड़ों के बीच 4632 मीटर (15,192.96 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। इन सात पहाड़ों पर निशान साहिब झूलते है । हेमकुंड साहिब ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा पहुँचा जाता है। गोविंदघाट से पैदल चढ़ाई शुरू होती है यहां से गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब की शोभा बढ़ाई जाती है। इस स्थान का उल्लेख गुरु गोबिंद सिंह द्वारा रचित दसम ग्रंथ में मिलता है। इस कारण यह सिखों का पवित्र धार्मिक स्थल है।