देहरादून , पहाड़ न्यूज टीम

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड से सांसद राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आज दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश हुए. राहुल गांधी से ईडी की पूछताछ का देशभर में कांग्रेस नेता विरोध कर रहे हैं. देहरादून में भी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करण महारा के साथ सैकड़ों कांग्रेसियों ने विरोध प्रदर्शन किया और क्रॉस रोड पर प्रवर्तन निदेशालय का घेराव किया.

इससे पहले कांग्रेसियों ने बुद्धा चौक से क्रॉस रोड तक पैदल मार्च निकाला और ईडी कार्यालय पहुंचकर धरना दिया और जोरदार नारेबाजी की. कांग्रेसियों का कहना है कि केंद्र सरकार राजनीतिक ईर्ष्या की भावना से जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है. ईडी कार्यालय के बाहर करण माहरा के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शन में कांग्रेस पार्टी के तमाम नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे.

क्या है नेशनल हेराल्ड केस ? नेशनल हेराल्ड मामला 2012 में सुर्खियों में आया था। तब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने निचली अदालत में एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि कुछ कांग्रेस नेताओं ने यंग इंडियन लिमिटेड (वाईआईएल) के माध्यम से एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का गलत अधिग्रहण किया था। स्वामी ने आरोप लगाया था कि यह सब दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस की 2000 करोड़ रुपये की इमारत पर कब्जा करने के लिए किया गया था। साजिश के तहत यंग इंडियन लिमिटेड को टीजेएल की संपत्ति का अधिकार दिया गया है।

हरीश रावत ने क्या कहा: कांग्रेस नेता हरीश रावत ने ट्वीट कर लिखा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को ईडी का नोटिस कांग्रेस कार्यकर्ता बर्दाश्त नहीं करेगा. इसके विरोध में आज दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय से ईडी कार्यालय तक “सत्यमेव जयते” शांतिपूर्ण मार्च निकाला गया, लेकिन जिस तरह से कांग्रेस पार्टी के शांतिपूर्ण मार्च को रोका जा रहा है, इस तानाशाही को पूरा देश देख रहा है। कांग्रेस मुख्यालय की घेराबंदी कर दी गई है, चारों ओर पुलिस तैनात कर दी गई है, राजनेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जा रहा है, मुझे भी अपने साथियों के साथ ईडी कार्यालय जाते समय हिरासत में लिया गया है, यह लोकतंत्र में बिल्कुल अनुचित है।

जमानत पर हैं राहुल और सोनिया गांधी: सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी को इस मामले में जल्द सुनवाई के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करने को कहा था. 19 दिसंबर 2015 को सोनिया गांधी और राहुल गांधी को निचली अदालत ने जमानत दे दी थी। 2016 में, सुप्रीम कोर्ट ने मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया और सोनिया गांधी, राहुल गांधी, दिवंगत मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडिस और सुमन दुबे को अदालत में पेश होने से छूट दी।