पिथौरागढ़ , PAHAAD NEWS TEAM
सीमांत जिले के सबसे बड़े महिला अस्पताल पिथौरागढ़ में भर्ती गर्भवती महिलाएं मोमबत्ती की लौ पर दूध गर्म कर नवजात बच्चों को दूध पिलाने को मजबूर हैं. इसके बाद भी आज तक प्रशासन ने सीमांत की महिलाओं का दर्द नहीं देखा. लोगों का कहना है कि हर वार्ड में नवजात बच्चों के लिए दूध गर्म करने के लिए कम से कम एक हीटर होना चाहिए, ताकि वार्ड में भर्ती गर्भवती महिलाओं और परिवार के सदस्यों को राहत मिल सके.
पिथौरागढ़ जिला महिला अस्पताल में भारत ही नहीं नेपाल से भी बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। प्रतिदिन लगभग चार से पांच सामान्य और दो से तीन सिजेरियन प्रसव होते हैं। सामान्य प्रसव वाली महिलाओं को एक या दो दिन में घर भेज दिया जाता है, लेकिन सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओं को एक सप्ताह के लिए अस्पताल में भर्ती किया जाता है। ऐसे में जहां सिजेरियन महिला को भर्ती किया जाता है वहीं नवजात शिशु की देखभाल की जाती है।
कुछ मामलों में नवजात शिशु मां का दूध नहीं पीते हैं। ऐसे बच्चों को तेज चम्मच या रुई के फाहे से गाय का दूध पिलाया जाता है। सर्दियों में दूध ठंडा हो जाता है। जिला महिला अस्पताल के किसी भी वार्ड में नवजात बच्चों के लिए दूध गर्म करने की व्यवस्था नहीं है। जब बच्चे को भूख लगने पर तीमारदार या महिलाएं मोमबत्ती के सहारे दूध गर्म कर बच्चों को दूध पिलाती हैं। ऐसे में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
महिला अस्पताल के पास कैंटीन नहीं होने के कारण उन्हें मोमबत्ती जलाकर दूध गर्म करना पड़ रहा है. इस तरह की परेशानी रात में ज्यादा उठानी पड़ती है। इसके बाद भी सीमांत की महिलाओं का दर्द आज तक किसी को नहीं दिखा है। लोगों का कहना है कि कम से कम हर वार्ड में नवजात शिशुओं के लिए दूध गर्म करने के लिए हीटर या इलेक्ट्रिक केतली होनी चाहिए।
पिथौरागढ़ महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड बंद होने से महिलाएं परेशान हैं। पहले महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए पिथौरागढ़ महिला अस्पताल आना पड़ता है। यहां आपात स्थिति में पांच से सात महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए जिला अस्पताल भेजा जाता है। इसके बाद यहां महिलाओं का अल्ट्रासाउंड होता है। महिलाओं के लिए पहले महिला के जाने और फिर जिला अस्पताल जाने में समय लगता है।
मोमबत्ती के सहारे दूध करने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। जल्द ही महिला अस्पताल में नवजात बच्चों का दूध गर्म करने की व्यवस्था की जाएगी।
डॉ. केसी भट्ट, पीएमएस जिला अस्पताल पिथौरागढ़

