देहरादून , PAHAAD NEWS TEAM

चुनाव नजदीक है तो मेनिफेस्टो बनना शुरू हो गया है परन्तु इस बार मेनिफेस्टो सिर्फ पार्टियां नहीं बल्कि जनता भी बनाएगी । इस बार चुनाव में नेता और जनता के बीच एक लिखित एग्रीमेंट होना चाहिए जिसमे सारी बाते लिखे होनी चाहिए फिर नेता जनता को धोखा नहीं दे सकते है। लिखित एग्रीमेंट होने के बाद नेता पलट नहीं सकते है जिसका पैदा सबको होगा। जो नेता लिखित एग्रीमेंट पर लिखी बात को नहीं मानेगा उसे अगली बार वोट नहीं मिलेंगे इस तरह हम अपने वोट को बचा सकते है।

राजनीतिक सुधारक शरत शर्मा ने PAHAAD NEWS से बात करते हुए ये बात भी कही कि न्यायलय में चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को अपने वादों – इरादों का एफिडेविट देना चाहिए । इसमें ज्यादा वादों की अनुमति नहीं होनी चाहिए । वादे पूरे न करने पर सदस्यता समाप्त के साथ साथ वेतन पेंशन भी जब्त की जानी चाहिए।

सब नेताओं को अपना लिखित एग्रीमेंट जनता को देना चाहिए अगर नेता अपना वादा पूरा नहीं करता तो हम ये एग्रीमेंट लेकर उसके पास जा सकते है। नेता चुनाव में जनता को शराब का लालच देते है और उनसे वोट ले लेते है। 75 साल से देश में सरकारे , संसद आती है और चली जाती है युवाओ को इकट्ठा किया जाता है विकास के नाम पर वोट मांगे जाते है लेकिन जब रोजगार की बात आती है तो सब गायब हो जाते है।

बूथ इकोनॉमिक्स

शरत शर्मा ने ये भी कहा है कि मेरा वोट मेरी करेंसी है , करेंसी से में तीन बार सरकार चुनता हू । में अपना वोट इन्वेस्ट करता हू में सरकार को टैक्स देता हू , वो हमारे युवाओ को नौकरी दे। आप सब लोग सड़क पर टोल भी देते है जब पार्टी युवाओ को इलेक्शन के समय अपने साथ रखती है तो इलेक्शन के बाद युवाओ को उनके ही बूथ पर नौकरी दे दी जाये ताकि पलायन भी रुक जाये . इनका कभी भी ट्रांसफर नहीं होना चाहिए वो अपने बूथ के अंदर ही काम करे सरकार उन्हें सैलेरी दे और ये जॉब परमानेंट होनी चाहिए सरकार इनसे काम कराये। इससे पलायन भी रुकेगा अगर हम एक बूथ पर 10 लोगो को नौकरी देते है तो मुश्किल से 12 से 14 करोड़ का खर्चा आयेगा। बूथ इकोनॉमिक्स में सबसे पहली बात युवाओ को रोजगार देना है।