धारचूला , PAHAAD NEWS TEAM
जौहार, दारमा और चौदास की तरह व्यास घाटी जल्द ही पर्यटकों से गुलजार रहेगी. इस बेहद खूबसूरत घाटी में पर्यटकों की आमद तुलनात्मक रूप से कम है। देश और दुनिया के लोगों को इस क्षेत्र की जानकारी देने के लिए उत्तराखंड सरकार 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित गुंजी गांव में व्यास महोत्सव का आयोजन कर रही है. जिसकी शुरुआत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 20 अक्टूबर को करेंगे।
व्यास घाटी चीन और नेपाल की सीमा पर स्थित है। इसी घाटी से कैलाश मानसरोवर यात्रा और भारत-चीन व्यापार होता है। देश भर से आने वाले कैलाश मानसरोवर के यात्रियों को यह घाटी बेहद पसंद आती है। एक साल पहले तक इस घाटी तक पहुंचने के लिए पैदल ही जाना पड़ता है। अब सड़क का निर्माण भारतीय सीमा के अंतिम छोर तक कर दिया गया है। कोरोना के चलते पिछले दो साल से न तो कैलाश मानसरोवर यात्रा हो रही है और न ही भारत-चीन का व्यापार हो रहा है.
इस घाटी के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए पहली बार गुंजी गांव में शिव महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस उत्सव में लोग स्थानीय लोक संस्कृति, यहां के खान-पान , क्षेत्र में पाई जाने वाली बहुमूल्य जड़ी-बूटियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। सरकारी विभाग स्टॉल लगाकर स्थानीय लोगों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी देंगे। स्थानीय प्रशासन अधिक से अधिक लोगों को शिव महोत्सव में ले जाने का प्रयास कर रहा है। आने वाले वर्षों में शिव महोत्सव को और अधिक विस्तारित रूप दिया जाएगा।
गुंजी है कैलाश मानसरोवर यात्रा का अहम पड़ाव
कैलास मानसरोवर यात्रा का मुख्य पड़ाव गुंजी गांव है। करीब दस हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस गांव में कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री दो दिन आराम करते हैं। यहां यात्रियों की शारीरिक जांच की जाती है। टेस्ट में फिट पाए गए यात्री ही आगे की यात्रा कर सकेंगे। भारत के लिए भारतीय बाजार चीन व्यापार भी इस गांव में स्थापित किया गया है। कारोबार के दौरान यहां व्यापारियों की सुविधा के लिए कस्टम ऑफिस, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा भी खोली जाती है।
व्यास घाटी से आप ऊं पर्वत और छोटा कैलास देख सकते हैं
कैलाश मानसरोवर की तरह छोटा कैलास भारत की व्यास घाटी में स्थापित है। ऐसा माना जाता है कि छोटे कैलास के दर्शन भी कैलास मानसरोवर के दर्शन के समान फल देते हैं। छोटा कैलास के दर्शन के लिए श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इसी क्षेत्र से प्रकृति के अनुपम उपहार ऊं पर्वत के दर्शन भी होते हैं । इस पर्वत पर बर्फ से ऊं की आकृति दिखाई देती है।

