पिथौरागढ़ , PAHAAD NEWS TEAM
चीन सीमा से सटे पिथौरागढ़ का बसा दारमा घाटी का दर गांव इतिहास के पन्नों में कभी भी दर्ज हो सकता है. इस गांव में करीब 145 परिवार रहते हैं, जिन पर हर समय खतरे के बादल मंडराते रहते हैं। आलम यह है कि बिना बारिश के भी गांव में भूस्खलन हो रहा है. जिससे यहां 35 घर पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं, वहीं कई घरों में बड़ी दरारें आ गई हैं। गांव में हो रहे भू-स्खलन और भू-क्षरण से ग्रामीण भय के साये में जीने को मजबूर हैं।
पिथौरागढ़ जिले की दारमा घाटी में पड़ने वाला पहला गांव दर पिछले चार दशकों से खतरे में है। 1974 में यहां के कई परिवार सितारगंज में विस्थापित हुए थे, लेकिन अब धीरे-धीरे पूरा गांव खतरे में आ गया है. भूवैज्ञानिकों की टीम ने पूर्व में भी दारमा घाटी का दौरा किया था।
टीम लीडर प्रदीप कुमार का कहना है कि दर गांव पुराने भूस्खलन क्षेत्र में स्थित है. वहीं, सोबला-ढाकर रोड कटने से यहां भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। गांव के नीचे भूमिगत जल स्रोत है। जिससे लगातार पानी रिसता रहता है। जिससे धीरे-धीरे पूरा गांव खिसकता जा रहा है। टीम लीडर प्रदीप कुमार ने कहा कि गांव के 35 परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की जरूरत है.
वहीं आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र मेहर ने बताया कि 1974 में गांव के प्रभावित परिवारों को सितारगंज में विस्थापित किया गया था, लेकिन अधिकांश प्रभावित परिवार गांव में ही लौट गए. उन्होंने आसपास के सुरक्षित स्थानों पर शरण ली है।
आपको बता दें कि इस साल अक्टूबर में भारी बारिश के दौरान भी दर गांव में भारी भूस्खलन हुआ था. जिसके बाद कई घर खतरे में आ गए थे, लेकिन अब बिना बारिश के भी गांव लगातार जलमग्न हो रहा है. जिससे ग्रामीणों की परेशानी दिनों दिन बढ़ती जा रही है।

