हल्द्वानी : ज्येष्ठ मास की अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाता है. विवाहित महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और परिवार में सुख-शांति की कामना करती हैं। वट सावित्री व्रत को भी खास माना जाता है। इस बार वट सावित्री व्रत 19 मई, शुक्रवार को रखा जाएगा। इसी दिन दर्श अमावस्या भी मनाई जाएगी। नारद पुराण में इसे ब्रह्म सावित्री व्रत भी कहा गया है। इतना ही नहीं, 19 मई दिन शुक्रवार को बहुत ही शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन शनि जयंती भी शुभ होती है।
क्या है वट सावित्री व्रत: वट सावित्री के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए इस व्रत को रखती हैं। इस दिन महिलाएं सोलह आभूषण पहनती हैं और बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से यमराज के कोप और अकाल मृत्यु का खतरा नहीं रहता है। ज्योतिषाचार्य डॉ. नवीनचंद्र जोशी के अनुसार विवाहित महिलाओं को इस दिन पूजा-पाठ के साथ व्रत और विधि-विधान से बरगद के पेड़ की परिक्रमा करनी चाहिए, ताकि उन्हें मां सावित्री और त्रिदेव की कृपा से अनंत सौभाग्य का वरदान प्राप्त हो. .
वट सावित्री व्रत का शुभ मुहूर्त: अमावस्या तिथि की शुरुआत 18 मई गुरुवार को 09.40 बजे से होगी. समापन 19 मई को रात 09.20 बजे होगा। ऐसे में उदय तिथि के अनुसार वट सावित्री व्रत 19 मई को ही रखा जाएगा.
वट सावित्री व्रत और पूजा विधि : वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके व्रत का पारण करती हैं. इसके बाद नए या साफ वस्त्र धारण करें और 16 श्रृंगार करें। इस दिन बरगद के पेड़ की विधि-विधान से पूजा करें। पहले पेड़ को पानी दो। इसके बाद लौकी, चना, फूल अर्पित करें। इसके बाद पेड़ के पास बैठकर वट सावित्री व्रत कथा का पाठ करें। इसके बाद हाथ में लाल धागा या सूत लेकर पेड़ की परिक्रमा करें।धार्मिक मान्यता के अनुसार बरगद के पेड़ की परिक्रमा करने से सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पति और पुत्र की आयु के साथ-साथ परिवार में धन, समृद्धि, सुख-शांति बनी रहती है।
ये है वट सावित्री व्रत के बारे में मिथक: माना जाता है कि इस दिन सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान की जान बचाई थी। इसलिए इस दिन व्रत करने से निरंतर सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यता है कि सावित्री बरगद के पेड़ के नीचे अपने मृत पति के जीवन को वापस लायी थी। यमराज ने उन्हें उनके धार्मिक धर्म से प्रसन्न करके आशीर्वाद दिया। यही वजह है कि महिलाएं वट सावित्री व्रत पर बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। मान्यता है कि सावित्री ने यमराज से 100 पुत्रों की माता होने का वरदान मांगा था।
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