उत्तरकाशी: जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम तक पांच किमी के दायरे में भी भूस्खलन से कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है. क्योंकि इस पैदल मार्ग में भी पहाड़ी के नीचे 100 से ज्यादा अस्थायी ढाबे बने हुए हैं. जहां भूस्खलन का खतरा लगातार बना रहता है. वहीं यमुनोत्री धाम के घोड़ा पड़ाव पर भी पत्थर गिरते रहते हैं. लेकिन प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किये गये हैं
केदारनाथ ट्रेक पर गौरीकुंड भूस्खलन जैसी घटना यमुनोत्री धाम ट्रेक पर कभी भी हो सकती है। क्योंकि यहां भी जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम तक पांच किलोमीटर की दूरी में पहाड़ी के नीचे 100 से ज्यादा अस्थायी ढाबे बने हैं। यमुनोत्री धाम के पैदल मार्ग की बात करें तो यहां भी तीन से चार सक्रिय भूस्खलन क्षेत्र हैं।

जिससे आवागमन में हमेशा परेशानी होती है। वहीं, बारिश के दौरान कब पहाड़ी से बड़ा बोल्डर नीचे आ जाए, कोई नहीं जानता. इसकी बानगी अतीत में मिलती है। जब यमुनोत्री पैदल मार्ग पर पहाड़ी से एक बड़ा पत्थर गिर गया.
हालांकि, इस बीच हाईवे बंद होने के कारण यात्रा रोक दी गई, इसलिए हादसा टल गया. वहीं, 30 जून को भी यमुनोत्री धाम पैदल मार्ग के प्रमुख पड़ाव भैरो मंदिर के पास पथराव से एक ढाबा क्षतिग्रस्त हो गया था. जहां ढाबा मैनेजर और यात्रियों ने भागकर अपनी जान बचाई।
वहीं, यमुनोत्री धाम के घोड़ा पड़ाव में भी बारिश का खतरा लगातार बना हुआ है. यहां लगातार भूस्खलन और पत्थर गिर रहे हैं, जो कभी भी बड़ी आपदा का कारण बन सकते हैं।
एसडीएम बड़कोट जितेंद्र कुमार का कहना है कि गौरीकुंड आपदा को देखते हुए राजस्व विभाग कर्मियों को भूस्खलन संभावित क्षेत्र में पहाड़ी के नीचे बने सभी ढाबों या आवासों को खाली कराने के निर्देश दिए गए हैं।
दृष्टि पत्र 25 संकल्प 2022 के कार्य की प्रगति की समीक्षा अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने की


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