गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं के संरक्षण और डिजिटल सशक्तिकरण के लिए संयुक्त अभियान शुरू
देहरादून – उत्तराखंड की लोकभाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से आज एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय साझेदारी की घोषणा की गई। *AiSE – AI Strategic Engineering Foundation, *पद्म श्री प्रीतम भरतवाण जी की जागर अकादमी और माया देवी विश्वविद्यालय, देहरादून ने संयुक्त रूप से भाषा संरक्षण के लिए हाथ मिलाया है।
इस अवसर पर AiSE Foundation के संस्थापक सचिदानंद सेमवाल ने कहा, “यह सिर्फ भाषा बचाने का अभियान नहीं है, यह अपनी पहचान बचाने का अभियान है। आज हमारे बच्चे अपनी बोली भूल रहे हैं। अगर हमने अभी नहीं किया, तो कल हमारी गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी सिर्फ किताबों में रह जाएगी। हम चाहते हैं कि हमारी भाषा भी AI के युग में जिंदा रहे और आने वाली पीढ़ी अपनी बोली में ही तकनीक का उपयोग कर सके।”
जागर अकादमी के संस्थापक पद्म श्री प्रीतम भरतवाण जी ने कहा, “जागर, पंवारा, हारुल – ये सिर्फ गीत नहीं हैं, ये हमारे पुरखों की आत्मा हैं। इनमें हमारी भाषा सबसे शुद्ध रूप में बसी है। AiSE फाउंडेशन और माया देवी विश्वविद्यालय के साथ यह साझेदारी हमारी लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक पवित्र कार्य है। जब तक बोली बचेगी, तब तक पहाड़ बचेगा।”
माया देवी विश्वविद्यालय के प्रो.(डॉ.) आशीष सेमवाल जी ने कहा, “शिक्षा का असली उद्देश्य समाज से जुड़ना है। यह साझेदारी हमारे छात्रों के लिए एक अद्भुत अवसर है जहाँ वे अपनी तकनीकी शिक्षा का उपयोग अपनी ही संस्कृति और भाषा को बचाने के लिए कर सकेंगे। विश्वविद्यालय इस मिशन के लिए अपनी AI लैब, तकनीकी संसाधन और छात्र स्वयंसेवकों का पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।”
AiSE Foundation के बारे में:
AiSE – AI Strategic Engineering Foundation देहरादून स्थित एक Section 8 कंपनी है। फाउंडेशन का मिशन उत्तराखंड की हिमालयी भाषाओं और संस्कृति को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से संरक्षित करना है। फाउंडेशन की प्रमुख पहल ‘भाषा AI पहल’ के अंतर्गत क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण के लिए कार्य किया जा रहा है।
इस साझेदारी के प्रमुख उद्देश्य:
1. प्रामाणिक भाषा डेटा का संग्रह: गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार-भाबर के गांव-गांव से मूल वक्ताओं और लोक कलाकारों से आवाज के नमूने, लोकगीत और मौखिक परंपराओं का संग्रह।
2. युवा भागीदारी: छात्रों को वास्तविक शोध कार्य का अनुभव और अपनी संस्कृति से जुड़ने का अवसर।
3. तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग: विश्वविद्यालय की तकनीक और जागर अकादमी की सांस्कृतिक विशेषज्ञता का संगम।
4. भविष्य के लिए संरक्षण: ताकि भविष्य में हमारी अपनी भाषाओं में शिक्षा और सूचनाएं आम लोगों तक पहुंच सकें।
इस अभियान से जुड़ने के इच्छुक छात्र और भाषा प्रेमी पंजीकरण करें: https://aisefoundation.com/join.php

