मसूरी : बेरोजगार आंदोलन में जेल गये टीम संघर्ष के सदस्य नितिन दत्त एवं मोहन कैंतुरा के रिहा होने और शहीद स्थल पहुंचने पर ट्रेड यूनियनों, श्रमिक संघों, बेरोजगार संगठनों व अन्य संगठनों के सदस्यों ने माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया।
संघर्ष और बेरोजगारी संघ के नेता नितिन दत्त, मोहन कैंतुरा और सचिन गुहेर ने सबसे पहले शहीद स्थल पर पहुंचकर राज्य आंदोलन के शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. इस अवसर पर बेरोजगारी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले और बेरोजगारों के लिए जेल गए नितिन दत्त, मोहन कैंतरा व सचिन गुहेर का अभिनंदन किया गया।
राज्य में चल रहे बेरोजगार संघ आंदोलन के अध्यक्ष बॉबी पंवार व उपाध्यक्ष नितिन दत्त व सदस्य मोहन सिंह कैंतूरा तथा सचिन गुहेर भी इस महा आंदोलन का हिस्सा है। यह मसुरी वासियों के लिए बड़े गर्व की बात है।
6 दिन बाद जेल से बाहर आए मसुरी निवासी युवा समाजसेवी नितिन दत्त , मोहन सिंह कैंतूरा तथा इस आंदोलन का हिस्सा रहे और जिन्होंने लाठियां खाई, सचिन गुहेर का स्वागत समारोह किया गया।
इस मौके पर ट्रेड यूनियन अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि नितिन दत्त और मोहन कैंतुरा ने मसूरी में बेरोजगारों के आंदोलन का नेतृत्व किया और राज्य के बेरोजगारों के लिए जेल गए. उन्होंने कहा कि जब बेरोजगारों ने पेपर लीक और भर्ती घोटाले का विरोध किया तो सरकार ने उन पर लाठीचार्ज कर उन्हें जेल में डाल दिया.जिसमें दो युवक मसूरी के रहने वाले थे, जो छह दिन जेल में रहे और जेल से छूटने के बाद मसूरी पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि सरकार जल्द ही भर्ती घोटाले और पेपर लीक मामलों की सीबीआई जांच शुरू करेगी।
इस मौके पर जेल से लौटे नितिन दत्त ने कहा कि बेरोजगारी आंदोलन में सरकार ने युवाओं पर लाठीचार्ज किया. लेकिन जब सरकार के पास पूरा सिस्टम है तो भर्ती और पेपर लीक घोटाला कैसे हो गया। यह आंदोलन तभी रुकेगा जब सीबीआई जांच होगी। सरकार जल्द सीबीआई जांच का आदेश दे, नहीं तो हम भूख हड़ताल पर बैठेंगे। जिनसे लेलर बाॅबी पंवार जल्द ही बातचीत करेंगे और आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे.इसमें सबका सहयोग है।
प्रदेश में बेरोजगारों को रोजगार नहीं मिल रहा है। अभिभावकों को भी आगे आकर अपने बच्चों के भविष्य की चिंता करनी होगी। किसी को सोचना पड़ेगा कि उनके बच्चे क्यो नहीं निकल पा रहे है। ऐसे लोग, जिन्हें पता चल गया है कि वह पैसे देकर लगा है, उन्हें सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर देना चाहिए।

